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आईपीएस मृदुल कच्छावा की बायोग्राफी | IPS Mridul Kachawa Biography in Hindi

On: मार्च 19, 2026 8:37 पूर्वाह्न
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मृदुल कच्छावा भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के एक तेजतर्रार और चर्चित अधिकारी हैं, जो राजस्थान कैडर से संबंधित हैं। अपनी सख्त कार्यशैली, अपराधियों के खिलाफ कड़े एक्शन और प्रभावशाली प्रशासनिक क्षमता के कारण उन्हें व्यापक पहचान मिली है। उन्हें कई स्थानों पर “राजस्थान का सिंघम” भी कहा जाता है।

आईपीएस मृदुल कच्छावा की बायोग्राफी | IPS Mridul Kachawa Biography in Hindi
आईपीएस मृदुल कच्छावा की बायोग्राफी | IPS Mridul Kachawa Biography in Hindi

प्रारंभिक जीवन और जन्म

विवरणजानकारी
नाम (Name)मृदुल कच्छावा (Mridul Kachawa)
जन्म तिथि30 अगस्त 1989
जन्म स्थानबीकानेर, राजस्थान
आयु36 वर्ष (2025 के अनुसार)
पेशाआईपीएस अधिकारी
UPSC रैंक216
रोल नंबर595934
मार्क्स933
बैच2015
कैडरराजस्थान
वर्तमान पदनागौर एसपी
पोस्टिंग स्थानराजस्थान

शिक्षा और शैक्षणिक योग्यता

विवरणजानकारी
स्कूलकेंद्रीय विद्यालय नंबर 1, जयपुर
कॉलेजकॉमर्स कॉलेज, जयपुर
विश्वविद्यालयराजस्थान यूनिवर्सिटी
स्नातकबीकॉम
प्रोफेशनल कोर्सचार्टर्ड अकाउंटेंट (CA), कंपनी सेक्रेटरी (CS)
परास्नातकइंटरनेशनल बिजनेस में मास्टर डिग्री

पारिवारिक जानकारी

विवरणजानकारी
पिता का नामउपलब्ध नहीं
माता का नामउपलब्ध नहीं
भाईउपलब्ध नहीं
वैवाहिक स्थितिविवाहित
पत्नी का नामकनिका सिंह

अन्य जानकारी

विवरणजानकारी
धर्महिंदू
जातिराजपूत
समुदायसामान्य वर्ग
भाषाहिंदी, इंग्लिश, मारवाड़ी
नागरिकताभारतीय
राशिसिंह
शौकघुड़सवारी, बास्केटबॉल, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी, डॉग लवर
वर्तमान पताजयपुर, राजस्थान

मृदुल कच्छावा का जन्म 30 अगस्त 1989 को राजस्थान के बीकानेर जिले में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उनके पिता सरकारी सेवा में कार्यरत रहे हैं और वर्तमान में सेवानिवृत्त हैं। पारिवारिक पृष्ठभूमि अनुशासन और शिक्षा पर आधारित रही, जिसका प्रभाव उनके व्यक्तित्व पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

शिक्षा

उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बीकानेर से प्राप्त की। इसके बाद उनका परिवार जयपुर स्थानांतरित हो गया, जहां उन्होंने केंद्रीय विद्यालय से सीनियर सेकेंडरी शिक्षा पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने कॉमर्स कॉलेज, जयपुर से बी.कॉम की डिग्री प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से इंटरनेशनल बिजनेस में परास्नातक (मास्टर्स) की डिग्री हासिल की।

उच्च शिक्षा के प्रति उनकी रुचि यहीं तक सीमित नहीं रही। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) और कंपनी सेक्रेटरी (CS) जैसी कठिन पेशेवर परीक्षाओं की भी तैयारी की, जो उनके शैक्षणिक समर्पण को दर्शाती है।

करियर की शुरुआत

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मृदुल कच्छावा ने मुंबई में एक जर्मन बैंक में नौकरी शुरू की। हालांकि उनका प्रारंभिक सपना भारतीय सेना में अधिकारी बनने का था। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की परीक्षा में दो बार प्रयास किया, लेकिन सफलता प्राप्त नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा की ओर रुख किया।

यूपीएससी यात्रा

मृदुल कच्छावा दिल्ली जाकर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी में जुट गए और लगभग तीन वर्षों तक कठिन परिश्रम किया। वर्ष 2014 में उनका चयन भारतीय डाक सेवा (IPoS) में हुआ, लेकिन उनका लक्ष्य भारतीय पुलिस सेवा (IPS) था, इसलिए उन्होंने पुनः परीक्षा देने का निर्णय लिया।

वर्ष 2015 में उन्होंने UPSC परीक्षा में 216वीं रैंक प्राप्त कर भारतीय पुलिस सेवा में स्थान हासिल किया। यह उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और लक्ष्य के प्रति समर्पण का उदाहरण है।

पुलिस सेवा में करियर

आईपीएस बनने के बाद उनकी पहली नियुक्ति जनवरी 2017 में राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में प्रोबेशनरी सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में हुई। इसके बाद उन्होंने 2018 में श्रीगंगानगर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य किया।

जनवरी 2019 में उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), अजमेर में पुलिस अधीक्षक के रूप में नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने लगभग छह महीने तक सेवा दी। इसके पश्चात उन्हें धौलपुर जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने चंबल क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों और डकैतों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की।

इसके बाद जुलाई 2020 से जनवरी 2022 तक उन्होंने करौली जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य किया। जनवरी 2022 में उन्हें जयपुर दक्षिण में पुलिस उपायुक्त (DCP) के पद पर नियुक्त किया गया। 4 जुलाई 2022 को उनका स्थानांतरण झुंझुनूं जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में किया गया।

झुंझुनूं में लगभग 11 महीने सेवा देने के बाद 2 जुलाई 2023 को उनका स्थानांतरण भरतपुर जिले में किया गया, जहां उन्होंने वरिष्ठ पुलिस पद पर कार्यभार संभाला।

व्यक्तिगत जीवन

मृदुल कच्छावा विवाहित हैं। उनकी पत्नी का नाम कनिका सिंह है, जो एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की पुत्री हैं। उनका पारिवारिक जीवन सादगी और अनुशासन पर आधारित माना जाता है।

वेतन और सुविधाएं

भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों का वेतन सातवें वेतन आयोग के अनुसार निर्धारित होता है। एक आईपीएस अधिकारी का प्रारंभिक वेतन लगभग 56,100 रुपये प्रतिमाह होता है, जो पद और अनुभव के साथ बढ़ता है। इसके अतिरिक्त उन्हें सरकारी आवास, वाहन, सुरक्षा, स्टाफ और अन्य भत्ते भी प्रदान किए जाते हैं।

उपलब्धियां और सफलता

मृदुल कच्छावा ने अपने पुलिस करियर में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनके कारण वे राजस्थान के प्रभावशाली आईपीएस अधिकारियों में गिने जाते हैं। वर्ष 2015 की सिविल सेवा परीक्षा में 216वीं रैंक प्राप्त कर उन्होंने कम आयु में ही भारतीय पुलिस सेवा में स्थान प्राप्त किया, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

पुलिस सेवा में आने के बाद उनकी कार्यशैली हमेशा सख्त और परिणामोन्मुख रही है। धौलपुर जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने चंबल क्षेत्र में सक्रिय कुख्यात अपराधियों और डकैतों के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाया। उनके नेतृत्व में अपराध नियंत्रण के लिए की गई कार्रवाइयों से क्षेत्र में कानून व्यवस्था को मजबूत करने में सफलता मिली।

करौली जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया और कई मामलों में त्वरित कार्रवाई कर पुलिस प्रशासन की छवि को मजबूत किया। जयपुर दक्षिण में पुलिस उपायुक्त (DCP) के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने शहरी कानून व्यवस्था को बनाए रखने और अपराध नियंत्रण के लिए संगठित तरीके से कार्य किया।

झुंझुनूं और भरतपुर जैसे संवेदनशील जिलों में उनकी नियुक्ति इस बात का संकेत है कि प्रशासन को उनकी कार्यक्षमता और नेतृत्व क्षमता पर भरोसा रहा है। विभिन्न जिलों में लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलना उनकी प्रशासनिक दक्षता और विश्वसनीयता को दर्शाता है।

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह मानी जाती है कि उन्होंने अपने करियर के शुरुआती वर्षों में ही कठिन और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में प्रभावी पुलिसिंग का उदाहरण प्रस्तुत किया। उनकी कार्यशैली, निर्णय लेने की क्षमता और नेतृत्व गुणों ने उन्हें युवाओं के बीच एक प्रेरणास्रोत बना दिया है।

पुरस्कार और सम्मान

मृदुल कच्छावा को उनके उत्कृष्ट पुलिस कार्य और सेवा के लिए समय-समय पर सम्मानित किया गया है। उनके करियर की प्रमुख उपलब्धियों में एक महत्वपूर्ण सम्मान डीजीपी कमेंडेशन डिस्क अवार्ड है।

12 अक्टूबर 2022 को राजस्थान के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक मोहन लाल लाठर द्वारा उन्हें डीजीपी कमेंडेशन डिस्क से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें कानून व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण में प्रभावी भूमिका निभाने और उत्कृष्ट सेवा के लिए प्रदान किया गया।

यह पुरस्कार उनकी कार्यकुशलता, नेतृत्व क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक माना जाता है, जिसने उन्हें राज्य पुलिस सेवा में एक सक्षम और विश्वसनीय अधिकारी के रूप में स्थापित किया है।

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