नई दिल्ली में Delhi High Court ने एक बार फिर केंद्र सरकार को सख्त संदेश दिया है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में खाली पद को लेकर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि “कोर्ट को हल्के में नहीं लिया जा सकता।” यह मामला लंबे समय से आयोग में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों के खाली पदों से जुड़ा हुआ है, जिस पर अब अदालत ने कड़ा रुख अपना लिया है।

मुख्य न्यायाधीश D. K. Upadhyaya की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से स्पष्ट तौर पर कहा कि नियुक्तियों को लेकर टाइमलाइन मांगी गई थी, लेकिन जो हलफनामा दाखिल किया गया है, उसमें इस संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि अगर अगली बार बेहतर और स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया, तो संबंधित अधिकारियों को अदालत में तलब किया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल Chetan Sharma से कोर्ट ने कड़े सवाल किए। अदालत ने कहा कि पहले भी टाइमलाइन को लेकर निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद सरकार की तरफ से कोई स्पष्ट योजना पेश नहीं की गई। इस पर चेतन शर्मा ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि जो भी जरूरी होगा, सरकार वह कदम उठाएगी और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाएंगे।
हालांकि अदालत ने इस बात पर संतोष जरूर जताया कि आयोग में हाल ही में दो पदों पर नियुक्तियां की गई हैं, लेकिन बाकी प्रमुख पद अब भी खाली हैं। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में खाली पद का मुद्दा इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह एक वैधानिक संस्था है, जिसका काम देश के अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना है।
गौरतलब है कि इससे पहले 30 जनवरी को भी Delhi High Court ने इस मामले में चिंता जताई थी। अदालत ने कहा था कि अप्रैल 2025 से आयोग में अध्यक्ष का पद खाली पड़ा हुआ है, जो बेहद चिंताजनक है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया था कि कोई भी आयोग बिना प्रमुख के आखिर कैसे काम कर सकता है। इस मामले में अदालत ने 15 अक्टूबर 2025 को ही नोटिस जारी कर दिया था और केंद्र सरकार से जवाब मांगा था।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र को यह भी कहा था कि अगली तारीख का इंतजार करने के बजाय नियुक्ति की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जानी चाहिए, क्योंकि यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि आयोग का सुचारू रूप से काम करना जरूरी है और इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता Mujahid Nafees की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि अप्रैल 2025 से आयोग में कोई अध्यक्ष नहीं है और इसके अलावा उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों के पद भी लंबे समय से खाली पड़े हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस स्थिति के कारण आयोग का कामकाज लगभग ठप हो गया है।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में खाली पद बने रहने से न केवल आयोग की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है, बल्कि यह संविधान द्वारा दिए गए अल्पसंख्यकों के अधिकारों का भी उल्लंघन है। साथ ही, यह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम के प्रावधानों के खिलाफ भी माना जा रहा है।
मामले में यह भी बताया गया कि आयोग के पूर्व अध्यक्ष Iqbal Singh Lalpura का कार्यकाल 12 अप्रैल 2025 को समाप्त हो गया था। इसके बाद से आयोग के कुल सात पद खाली हो गए थे। इस स्थिति की जानकारी खुद केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने राज्यसभा में भी दी थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक सभी पदों पर नियुक्तियां नहीं की गई हैं।
फिलहाल Delhi High Court ने केंद्र सरकार को स्पष्ट संकेत दे दिया है कि इस मामले में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि अगली सुनवाई तक ठोस प्रगति दिखनी चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई में तय की गई है, जहां केंद्र सरकार को अपनी स्थिति और उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी देनी होगी।
कुल मिलाकर, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में खाली पद का मुद्दा अब गंभीर कानूनी और संवैधानिक बहस का रूप ले चुका है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि केंद्र सरकार इस पर कितनी तेजी से कार्रवाई करती है और क्या आयोग को जल्द ही उसका पूर्ण स्वरूप मिल पाता है या नहीं।

