मुजफ्फरनगर से सामने आई यह खबर सिर्फ एक गिरफ्तारी की नहीं, बल्कि एक ऐसे ठगी नेटवर्क के खुलासे की है, जिसने कई लोगों की मेहनत की कमाई को निशाना बनाया। लंबे समय से फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी आरोपी हाजी इकराम को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी उस वक्त हुई, जब वह सऊदी अरब से वापस भारत लौटा और खुद को सुरक्षित समझ रहा था।
पूरा मामला मुजफ्फरनगर के थाना सिविल लाइन क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी हाजी इकराम पर जैविक वर्मी कम्पोस्ट खाद के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोप है। यह कोई छोटा-मोटा फ्रॉड नहीं था, बल्कि सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा एक नेटवर्क था, जिसमें लोगों को निवेश के नाम पर फंसाया जाता था।
शुरुआत एक शिकायत से हुई थी। 25 फरवरी 2025 को इन्द्रा कॉलोनी निवासी राजकुमार ने थाना सिविल लाइन में तहरीर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि “स्टेप फार्मिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड” नाम की कंपनी के जरिए उन्हें जैविक खाद के बिजनेस में निवेश करने का लालच दिया गया। शुरुआत में सब कुछ भरोसेमंद दिखाया गया—कागजात, प्लान, रिटर्न का वादा—लेकिन जैसे ही पैसे निवेश कराए गए, कहानी बदलने लगी।
राजकुमार के मुताबिक, जब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे तो उन्हें टालमटोल किया गया। बाद में दबाव बनाने पर उन्हें धमकियां भी मिलने लगीं। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। धीरे-धीरे यह साफ हुआ कि यह सिर्फ एक व्यक्ति के साथ नहीं, बल्कि कई लोगों के साथ हुआ एक बड़ा धोखाधड़ी का मामला है।
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने गिरोह के दो अन्य सदस्यों जुनैद अंसारी और खालिद अंसारी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड हाजी इकराम लगातार पुलिस की पकड़ से दूर था। वह न सिर्फ फरार था, बल्कि देश छोड़कर सऊदी अरब चला गया था, जिससे उसे पकड़ना और मुश्किल हो गया।
इस बीच, पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया। लगातार इनपुट जुटाए जा रहे थे, लोकेशन ट्रैक की जा रही थी और नेटवर्क को तोड़ने की कोशिशें जारी थीं। आखिरकार गुरुवार को एक पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस ने मॉल रोड इलाके से उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, हाजी इकराम ईद के मौके पर भारत लौटा था। उसे लगा कि इतने समय बाद शायद पुलिस का ध्यान उस पर कम हो गया होगा, लेकिन वह गलत साबित हुआ। जैसे ही उसकी मौजूदगी की जानकारी मिली, पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया।
गिरफ्तारी के बाद जब उससे पूछताछ की गई, तो उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने स्वीकार किया कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी कंपनी बनाई और लोगों को निवेश के नाम पर फंसाया। उन्हें बताया जाता था कि जैविक खाद का बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है और इसमें निवेश करने पर मोटा मुनाफा मिलेगा।
लोगों को विश्वास दिलाने के लिए कंपनी का पूरा सेटअप तैयार किया गया था—ऑफिस, दस्तावेज, प्रेजेंटेशन, यहां तक कि नकली सफलता की कहानियां भी सुनाई जाती थीं। कई लोगों ने इसमें लाखों रुपये तक निवेश कर दिए, लेकिन बाद में उन्हें कोई रिटर्न नहीं मिला।
पुलिस ने आरोपी के पास से एक लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन, पांच अलग-अलग कंपनियों के सिम कार्ड और एक पासपोर्ट बरामद किया है। इन सामानों से यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह लंबे समय से इस ठगी के नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था और अलग-अलग नंबरों के जरिए लोगों से संपर्क करता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि हाजी इकराम एक शातिर अपराधी है, जिसके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं। मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और रुड़की जैसे इलाकों में उसके खिलाफ कुल छह मुकदमे दर्ज बताए जा रहे हैं। यानी यह पहली बार नहीं था जब उसने इस तरह का अपराध किया हो।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस तरह की ठगी के मामले पिछले कुछ समय में बढ़े हैं, जहां लोगों को आसान मुनाफे का लालच देकर फंसाया जाता है। खासकर गांव और छोटे शहरों में रहने वाले लोग जल्दी विश्वास कर लेते हैं, जिससे ऐसे गिरोहों को मौका मिल जाता है।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं और किन-किन इलाकों में इस तरह की ठगी की गई है। साथ ही, जिन लोगों ने इसमें पैसा लगाया है, उनकी सूची भी तैयार की जा रही है ताकि उन्हें न्याय दिलाया जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। फिलहाल हाजी इकराम से लगातार पूछताछ की जा रही है और उसके बैंक अकाउंट्स, ट्रांजैक्शन और संपर्कों की जांच की जा रही है।
यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि निवेश के नाम पर मिलने वाले बड़े रिटर्न के वादों से सावधान रहना कितना जरूरी है। अगर कोई योजना बहुत ज्यादा फायदा देने का दावा कर रही है, तो उसमें जोखिम भी उतना ही ज्यादा होता है।
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी कंपनी या योजना में निवेश करने से पहले उसकी पूरी जांच करें। सिर्फ कागजों या बातों के आधार पर भरोसा न करें, बल्कि उसकी वैधता और रिकॉर्ड भी देखें।
कुल मिलाकर, मुजफ्फरनगर में हुई यह गिरफ्तारी एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, जिसने एक बड़े ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। लेकिन इसके साथ ही यह भी एक चेतावनी है कि ऐसे अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं, और उनसे बचने के लिए जागरूक रहना ही सबसे बड़ा हथियार है।

