वैष्णव के अनुसार, मौजूदा हालात में भारत की सप्लाई कई विकसित देशों से भी बेहतर है। होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित रुकावट के बावजूद देश की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित नहीं हुई है, जो भारत की रणनीति की सफलता को दर्शाता है।
ईरान संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ा भरोसेमंद संदेश सामने आया है। अश्विनी वैष्णव ने साफ कहा है कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और देश ऊर्जा से लेकर सेमीकंडक्टर यानी चिप तक हर क्षेत्र में नई कहानी लिख रहा है।
उन्होंने बताया कि जब दुनिया के कई विकसित देश सप्लाई चेन की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, तब भारत ने अपनी रणनीति के दम पर खुद को स्थिर बनाए रखा है। खासकर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की तैयारी और विविधता अब एक बड़ी ताकत बनकर सामने आई है।
वैष्णव ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित रुकावट को लेकर जो आशंकाएं जताई जा रही थीं, उनका भारत पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। इसकी वजह यह है कि देश अब कच्चे तेल के लिए सिर्फ एक या दो क्षेत्रों पर निर्भर नहीं है, बल्कि 40 से अधिक देशों से आयात करता है। इससे किसी एक मार्ग या क्षेत्र में समस्या आने पर भी सप्लाई बनी रहती है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने अपने रणनीतिक भंडार और रिफाइनिंग क्षमता को मजबूत किया है। देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और ऊर्जा की उपलब्धता पूरी तरह नियंत्रण में है। यही कारण है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत में ईंधन की कमी जैसी स्थिति नहीं बनी।
सिर्फ ऊर्जा ही नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का फोकस अब सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पर है, जिससे देश को चिप निर्माण में आत्मनिर्भर बनाया जा सके। आने वाले समय में यह सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।
वैष्णव के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में आई तेजी ने भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बना दिया है। मोबाइल फोन, कंपोनेंट्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, जिससे निर्यात भी मजबूत हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद उत्पादन केंद्र बन चुका है। यही वजह है कि कई बड़ी वैश्विक कंपनियां भारत में निवेश बढ़ा रही हैं और यहां अपने मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित कर रही हैं।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह रणनीति लंबे समय में उसे वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाएगी। सप्लाई चेन को विविध बनाना, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और नई तकनीकों पर फोकस करना—ये सभी कदम देश को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं।
हालांकि, चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। वैश्विक बाजार में अस्थिरता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारक आगे भी असर डाल सकते हैं। लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारत ने इन जोखिमों को काफी हद तक नियंत्रित किया है।
कुल मिलाकर, ईरान संकट जैसे संवेदनशील हालात के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था का स्थिर रहना यह दर्शाता है कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऊर्जा सुरक्षा से लेकर चिप निर्माण तक, भारत अब आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की ओर मजबूत कदम बढ़ा रहा है।





