India-Myanmar Border Drug Seizure: मिजोरम से भारत-म्यांमार सीमा पर ड्रग्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आई है। एंटी नारकोटिक्स विभाग ने एक संयुक्त ऑपरेशन में भारी मात्रा में प्रतिबंधित नशीला पदार्थ बरामद किया है।
जानकारी के अनुसार, इस ऑपरेशन में करीब 7.907 किलो मेथामफेटामाइन टैबलेट जब्त की गई हैं, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 23.72 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस बड़ी कार्रवाई ने एक बार फिर सीमा पार से होने वाली ड्रग तस्करी के नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह पूरा ऑपरेशन Champhai District में भारत-म्यांमार सीमा के पास अंजाम दिया गया। इस कार्रवाई में Assam Rifles और स्थानीय पुलिस ने मिलकर संयुक्त अभियान चलाया। अधिकारियों के मुताबिक, यह ऑपरेशन खुफिया इनपुट के आधार पर किया गया था, जिसके बाद संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए इलाके में तलाशी अभियान चलाया गया।
जांच के दौरान सुरक्षा बलों को हमुनहमेल्था रोड पर एक लावारिस वाहन खड़ा मिला। जब इस वाहन की तलाशी ली गई, तो उसमें भारी मात्रा में मेथामफेटामाइन टैबलेट बरामद हुईं। इसके बाद वाहन को भी जब्त कर लिया गया और पूरे मामले को आगे की जांच के लिए संबंधित विभागों को सौंप दिया गया है। बरामद ड्रग्स और वाहन दोनों को अब एक्साइज और नारकोटिक्स विभाग की निगरानी में रखा गया है।
बताया जा रहा है कि मेथामफेटामाइन एक अत्यंत खतरनाक साइकोट्रॉपिक ड्रग है, जो सीधे मानव मस्तिष्क के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती है। भारत में इस तरह की ड्रग्स पूरी तरह प्रतिबंधित हैं और इसकी तस्करी को गंभीर अपराध माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की ड्रग्स का सेवन न केवल मानसिक संतुलन को बिगाड़ता है, बल्कि लंबे समय तक इसके उपयोग से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
इस ऑपरेशन को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि मिजोरम और म्यांमार की सीमा लंबे समय से ड्रग तस्करी के लिए संवेदनशील मानी जाती रही है। अंतरराष्ट्रीय तस्कर इस रूट का इस्तेमाल कर भारत में नशीले पदार्थों की सप्लाई करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में इस तरह की बड़ी बरामदगी सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता को दर्शाती है।
हाल के दिनों में इस इलाके से जुड़े कुछ और गंभीर मामले भी सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, National Investigation Agency ने हाल ही में छह यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया था। इन पर आरोप था कि वे म्यांमार में घुसे आतंकियों को ड्रोन ट्रेनिंग देने आए थे। पूछताछ में देश के खिलाफ साजिश रचने के संकेत भी मिले थे। इस घटनाक्रम ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रग तस्करी और आतंकी गतिविधियों के बीच कई बार संबंध होते हैं। तस्करी से होने वाली कमाई का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों को फंड करने में किया जा सकता है। इसलिए इस तरह के ऑपरेशन न केवल ड्रग्स पर लगाम लगाने के लिए जरूरी हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
फिलहाल इस मामले में आगे की जांच जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह ड्रग्स किस नेटवर्क के जरिए लाई गई थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे रैकेट को तोड़ने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
कुल मिलाकर, भारत-म्यांमार सीमा पर हुई यह कार्रवाई एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। इससे न केवल करोड़ों रुपये की ड्रग्स को बाजार में पहुंचने से रोका गया है, बल्कि तस्करी के एक बड़े नेटवर्क को भी झटका लगा है। आने वाले समय में इस तरह के और ऑपरेशन देखने को मिल सकते हैं, जिससे सीमा पार अपराधों पर काबू पाने में मदद मिलेगी।

