Rajasthan Canal Closure 2026: राजस्थान में सिंचाई और पेयजल व्यवस्था को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य में 27 मार्च 2026 से नहरबंदी लागू की जाएगी, जिसका सीधा असर इंदिरा गांधी नहर प्रणाली से जुड़े कई जिलों पर पड़ेगा। इस फैसले के तहत Indira Gandhi Canal के मुख्य फीडर और मुख्य नहर दोनों में चरणबद्ध तरीके से पानी की सप्लाई बंद की जाएगी।

जानकारी के अनुसार, इंदिरा गांधी नहर के मुख्य फीडर पर 27 मार्च से नहरबंदी शुरू होगी, जबकि मुख्य नहर में यह बंदी 10 मई 2026 तक जारी रहेगी। इस दौरान नहर में पानी की आपूर्ति पूरी तरह से बंद रहेगी, जिससे सिंचाई और पेयजल दोनों व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है।
दरअसल, यह नहरबंदी पंजाब क्षेत्र में नहरों की रिलाइनिंग और मरम्मत कार्य के चलते की जा रही है। Punjab के हिस्से में चल रहे इस कार्य के कारण नहर में पानी की सप्लाई अस्थायी रूप से रोकी जा रही है। पहले पंजाब सरकार की ओर से 20 मार्च से नहरबंदी की योजना बनाई गई थी, लेकिन राजस्थान सरकार के अनुरोध के बाद इसमें बदलाव किया गया।
राजस्थान सरकार ने पहले 30 मार्च से नहरबंदी लागू करने के लिए पत्र लिखा था, ताकि राज्य के अंदर जल प्रबंधन की बेहतर तैयारी की जा सके। हालांकि अब संशोधित कार्यक्रम के तहत 27 मार्च से ही यह बंदी लागू की जा रही है, जिससे प्रशासन को कम समय में तैयारी करनी होगी।
इस नहरबंदी का सबसे ज्यादा असर राजस्थान के 13 जिलों पर पड़ने वाला है, जहां पेयजल और सिंचाई के लिए इस नहर पर निर्भरता अधिक है। इन जिलों में गर्मी के मौसम में पानी की मांग पहले से ही बढ़ जाती है, ऐसे में नहरबंदी एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है। विभाग का कहना है कि नहरबंदी के दौरान प्रभावित जिलों में पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसके तहत जलाशयों में पानी का भंडारण, टैंकरों के माध्यम से सप्लाई और अन्य जल स्रोतों का उपयोग किया जाएगा, ताकि आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो।
अधिकारियों के अनुसार, नहरबंदी के दौरान सबसे बड़ी प्राथमिकता पेयजल आपूर्ति को बनाए रखना है। इसके लिए जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों के साथ समन्वय कर योजना बनाई जा रही है। जहां जरूरत होगी, वहां अतिरिक्त टैंकर भेजे जाएंगे और जल वितरण की निगरानी भी की जाएगी।
कृषि क्षेत्र पर भी इस नहरबंदी का असर पड़ सकता है। हालांकि इस समय रबी फसलों की कटाई का दौर चल रहा है, फिर भी जिन क्षेत्रों में देर से फसल तैयार होती है, वहां सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में किसानों को वैकल्पिक सिंचाई साधनों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नहरों की रिलाइनिंग और मरम्मत कार्य लंबे समय के लिए फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे पानी की बर्बादी कम होती है और सप्लाई सिस्टम मजबूत बनता है। हालांकि अल्पकालिक रूप से इससे कुछ कठिनाइयां जरूर होती हैं, जिन्हें प्रशासनिक तैयारियों के जरिए कम किया जा सकता है।
राजस्थान में हर साल गर्मियों के दौरान पानी की कमी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आती है। ऐसे में नहरबंदी के दौरान जल प्रबंधन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। सरकार ने इस बार पहले से तैयारी कर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि किसी भी जिले में पेयजल संकट न उत्पन्न हो।
कुल मिलाकर, 27 मार्च से शुरू होने वाली यह नहरबंदी एक जरूरी तकनीकी कार्य के तहत की जा रही है, लेकिन इसका असर आम लोगों और किसानों पर भी पड़ेगा। ऐसे में प्रशासन की तैयारियां और लोगों का सहयोग दोनों ही इस चुनौती से निपटने में अहम भूमिका निभाएंगे।

