Shimla: चौड़ा मैदान में आउटसोर्स कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन, स्थायी नीति, समान काम का समान वेतन और नौकरी में सुरक्षा की मांग
शिमला के चौड़ा मैदान में आउटसोर्स कर्मचारियों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। बड़ी संख्या में जुटे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए अपनी लंबित मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और साफ कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस फैसले चाहिए।
प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों का कहना था कि वे लंबे समय से सरकारी विभागों में काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो स्थायी नौकरी का दर्जा मिल रहा है और न ही अन्य सुविधाएं। आउटसोर्स व्यवस्था में काम करने के कारण उन्हें हर समय नौकरी जाने का डर बना रहता है, जिससे उनका भविष्य असुरक्षित बना हुआ है।
कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग “समान काम का समान वेतन” लागू करने की है। उनका कहना है कि वे वही काम करते हैं जो स्थायी कर्मचारी करते हैं, लेकिन वेतन और सुविधाओं में भारी अंतर है। इस असमानता को खत्म करने के लिए उन्होंने सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की।
इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने स्थायी नीति लागू करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि कई सालों से सेवा देने के बावजूद उन्हें नियमित नहीं किया जा रहा है। ऐसे में उनके करियर और परिवार दोनों पर असर पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकाला गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने यह भी कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था में उन्हें न तो मेडिकल सुविधा मिलती है और न ही अन्य सामाजिक सुरक्षा। इससे उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
कर्मचारियों का कहना है कि सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए और एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करना चाहिए, जिससे उन्हें स्थिरता और सुरक्षा मिल सके। उनका मानना है कि अगर उनकी मांगें पूरी होती हैं, तो इससे न केवल उनका जीवन बेहतर होगा, बल्कि काम की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
फिलहाल प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को बातचीत का आश्वासन दिया गया है, लेकिन कर्मचारी अब ठोस फैसले का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और क्या आउटसोर्स कर्मचारियों की मांगों पर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है या नहीं।










