PFC के शेयर आज 4% ऊपर गए और वजह सिर्फ एक दिन की खबर नहीं है। विलय, लाभांश, 1.6 लाख करोड़ का उधार योजना और मोतीलाल ओसवाल का 500 रुपये का लक्ष्य, यह सब एक साथ हो रहा है। पूरी कहानी यहां है।
18 मार्च 2026 | शेयर बाजार | 4 मिनट पढ़ें
मुख्य बातें
- PFC का शेयर आज 4% ऊपर, 434 रुपये के पास पहुंचा
कंपनी FY27 में 1.6 लाख करोड़ तक उधार लेगी
REC के साथ विलय होगा, भारत का सबसे बड़ा पावर फाइनेंसर बनेगा
शेयरधारकों को 3.25 रुपये प्रति शेयर लाभांश मिलेगा
मोतीलाल ओसवाल का लक्ष्य मूल्य 500 रुपये प्रति शेयर
आज PFC में इतनी तेजी क्यों आई, एक ही दिन में तीन बड़े फैसले हो गए
आज पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन यानी PFC का शेयर BSE पर 4% ऊपर चढ़ा और 434.85 रुपये तक पहुंचा। कारोबार भी जोरदार रहा, यानी सिर्फ एक-दो नहीं, काफी बड़े निवेशक खरीद रहे थे।
इसका कारण कोई एक चीज नहीं थी। कल यानी 17 मार्च को कंपनी के बोर्ड की बैठक हुई और उसमें एक साथ तीन बड़े फैसले लिए गए। जब एक ही दिन में इतनी सारी अच्छी खबरें आती हैं तो बाजार प्रतिक्रिया करता है, और आज बिल्कुल यही हुआ।
अभी PFC का शेयर अपने 52 हफ्ते के उच्च स्तर 443.95 रुपये के काफी करीब है। पिछले तीन महीनों में सेंसेक्स 9.4% गिरा, लेकिन PFC 28% ऊपर चढ़ा। यह सिर्फ किस्मत नहीं है, इस कंपनी में कुछ तो है जो निवेशकों को पसंद आ रहा है।
1.6 लाख करोड़ का योजना, यह सुनने में बड़ा लगता है लेकिन है क्या यह
बोर्ड ने मंजूरी दी कि PFC वित्त वर्ष 2027 यानी अप्रैल 2026 से मार्च 2027 के बीच 1.6 लाख करोड़ रुपये तक उधार ले सकती है। यह पैसा बॉन्ड से आएगा, टर्म लोन से आएगा, कमर्शियल पेपर से आएगा, घरेलू बाजार से भी और अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी।
अब यह सुनकर घबराना नहीं चाहिए। PFC एक वित्त पोषण कंपनी है, यानी यह लोग पैसा उधार लेकर बिजली क्षेत्र की कंपनियों को कर्ज देते हैं। जितना ज्यादा पैसा उधार लेंगे, उतना ज्यादा कर्ज दे पाएंगे, उतनी ज्यादा कमाई होगी। यह उनका बुनियादी व्यापार मॉडल है।
1.6 लाख करोड़ एक बड़ा आंकड़ा है लेकिन भारत में बिजली क्षेत्र का जो विस्तार हो रहा है, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रिड, बुनियादी ढांचा, उसके लिए यह पैसा चाहिए ही चाहिए।
लाभांश भी घोषित हुआ, रिकॉर्ड तारीख 23 मार्च है और यह आपके लिए क्यों मायने रखता है
बोर्ड ने यह भी घोषित किया कि शेयरधारकों को 3.25 रुपये प्रति शेयर का चौथा अंतरिम लाभांश मिलेगा वित्त वर्ष 2026 के लिए। रिकॉर्ड तारीख 23 मार्च 2026 रखी गई है, यानी जो लोग 23 मार्च तक PFC के शेयरधारक होंगे उन्हें यह लाभांश मिलेगा।
छोटी सी बात लगती है लेकिन बाजार में लाभांश की घोषणा एक सकारात्मक संकेत होता है। इसका मतलब कंपनी के पास नकदी है और वह शेयरधारकों को देना चाहती है। घाटे में चलने वाली कंपनी लाभांश नहीं देती।
REC के साथ विलय, यह सब में सबसे बड़ी खबर है और इसका असर दूर तक जाएगा
फरवरी 2026 के केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री ने घोषणा की थी कि PFC और REC का विलय होगा। आज की बोर्ड बैठक में इस दिशा में और स्पष्टता आई।
थोड़ा पृष्ठभूमि समझते हैं। PFC ने 2019 में REC में 52.63% हिस्सा खरीदा था, जिससे REC, PFC की सहायक कंपनी बन गई। अब दोनों को औपचारिक रूप से विलय करना है।
विलय के बाद जो संस्था बनेगी वह भारत का सबसे बड़ा बिजली क्षेत्र वित्तपोषक होगा। सिर्फ आकार की बात नहीं है, काम भी बेहतर होगा। दो अलग कंपनियों की जगह एक मजबूत कंपनी, दोहराव वाला काम बंद होगा, ऋणदाताओं के साथ सौदेबाजी की शक्ति बढ़ेगी और सरकार समर्थित होने की वजह से भरोसा पहले से है।
मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषकों का कहना है कि यह विलय सार्थक तालमेल प्रदान करेगा। PFC और REC के बीच जो प्रतिस्पर्धा थी वह खत्म होगी और एक प्रभावशाली संस्था बनेगी जो भारत के बिजली क्षेत्र को वित्त पोषित करेगी।
मोतीलाल ओसवाल ने 500 का लक्ष्य क्यों रखा, पूरा हिसाब यहां है
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने PFC पर खरीद की सिफारिश दी है और लक्ष्य मूल्य रखा है 500 रुपये प्रति शेयर। अभी शेयर 430 के आसपास है, यानी विश्लेषकों को अभी भी 16% से ज्यादा वृद्धि दिखती है।
उनका विश्लेषण यह है कि पिछली तिमाही थोड़ी मिली-जुली रही। ऋण वृद्धि धीमी रही, 2% से कम त्रैमासिक वृद्धि। लेकिन संपत्ति गुणवत्ता बेहतर हुई, एक बड़े फंसे हुए कर्ज का समाधान हुआ जिसे TRN Energy मामला कहते हैं, और शुद्ध ब्याज मार्जिन थोड़ा बेहतर हुआ।
कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि बुनियाद मजबूत है, विलय से और ताकत आएगी और भारत के बिजली क्षेत्र का भविष्य उज्जवल है। इसीलिए 500 का लक्ष्य।
विकसित भारत 2047 और PFC का रोल, यह संबंध समझना जरूरी है वरना पूरी तस्वीर अधूरी रहेगी
यह सिर्फ एक शेयर की कहानी नहीं है। भारत का 2047 तक विकसित भारत बनने का सपना है। इसके लिए बिजली क्षेत्र में बहुत बड़ा निवेश चाहिए। नवीकरणीय ऊर्जा तो है ही, आगे हरित हाइड्रोजन आएगा, छोटे मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर आएंगे, ऊर्जा भंडारण समाधान आएंगे, कार्बन कैप्चर तकनीक आएगी।
यह सब कौन वित्त पोषित करेगा? PFC और REC जैसी कंपनियां। विलय के बाद की संस्था के पास ज्यादा पूंजी होगी, ज्यादा विशेषज्ञता होगी और सरकार का पूरा समर्थन होगा। इस नजरिए से देखें तो यह सिर्फ एक तिमाही परिणाम नहीं है, यह एक दीर्घकालिक कहानी है।
क्या अभी भी खरीदना सही है या देर हो गई, दोनों तरफ की बात ध्यान से सुनो
यह निवेश सलाह नहीं है और निवेश से पहले अपना शोध जरूरी है। लेकिन जो तस्वीर बन रही है वह यह है।
एक तरफ सकारात्मक बातें हैं। विलय से पैमाना आएगा, लाभांश से आय होगी, 1.6 लाख करोड़ की उधार योजना आक्रामक वृद्धि दिखाती है और मोतीलाल ओसवाल जैसी बड़ी ब्रोकरेज 500 का लक्ष्य दे रही है।
दूसरी तरफ कुछ जोखिम भी हैं। विलय के बारीक विवरण अभी स्पष्ट नहीं हैं, ऋण वृद्धि अभी धीमी है और सरकारी नीतियों पर निर्भर रहना एक जोखिम कारक हमेशा रहता है।
पिछले तीन महीनों में जो 28% की तेजी आई है, उसने पहले से काफी वृद्धि की संभावना कैप्चर कर ली है। अभी जो 16% वृद्धि बाकी है वह तब मिलेगी जब विलय सफलतापूर्वक होगा और ऋण वृद्धि तेज होगी।
यह एक दीर्घकालिक कहानी है, अल्पकालिक व्यापार नहीं।
अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें दी गई कोई भी बात निवेश सलाह नहीं है। किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से जरूर बात करें।









