Bikaner News: बीकानेर में बी.एड. प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। हाल ही में आयोजित अंतिम प्रश्नपत्र में गंभीर त्रुटियाँ पाए जाने के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस पूरे मामले को लेकर अब विद्यार्थियों के हित में जिला प्रशासन से विशेष राहत की मांग की गई है।

जानकारी के अनुसार Maharaja Ganga Singh University द्वारा बी.एड. प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएँ आयोजित की जा रही थीं। परीक्षा के अंतिम प्रश्नपत्र के दौरान कई विद्यार्थियों ने शिकायत की कि प्रश्नपत्र में पूछे गए अधिकांश प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर हैं और कई प्रश्नों में स्पष्ट त्रुटियाँ भी हैं। परीक्षा समाप्त होने के बाद यह मुद्दा विद्यार्थियों के बीच चर्चा का विषय बन गया और कई जगहों पर इस संबंध में असंतोष भी देखने को मिला।
विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने पूरे सेमेस्टर के दौरान विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार तैयारी की थी, लेकिन परीक्षा के दिन जो प्रश्नपत्र दिया गया वह अपेक्षित सिलेबस से मेल नहीं खाता था। इससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को परीक्षा में कठिनाई हुई और उनका प्रदर्शन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
इसी बीच विद्यार्थियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अर्जुन पंचारिया सिंधु, जो कि श्री राष्ट्रीय परशुराम सेना बीकानेर के जिलाध्यक्ष हैं, ने जिला प्रशासन का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया है। उन्होंने जिला कलेक्टर को एक औपचारिक निवेदन पत्र भेजकर इस पूरे मामले में विद्यार्थियों को राहत देने की मांग की है।
अपने निवेदन में उन्होंने बताया कि बीकानेर जिले सहित आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी परीक्षा देने शहर आते हैं। इनमें से अधिकांश विद्यार्थी साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से संबंधित होते हैं। ऐसे में यदि विश्वविद्यालय द्वारा अंतिम प्रश्नपत्र की परीक्षा पुनः आयोजित की जाती है, तो विद्यार्थियों को एक बार फिर से परीक्षा देने के लिए बीकानेर आना पड़ेगा, जिससे उनके ऊपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
अर्जुन पंचारिया सिंधु ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि यदि बी.एड. प्रथम सेमेस्टर का अंतिम प्रश्नपत्र पुनः आयोजित किया जाता है, तो उस दिन केवल बी.एड. प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए सरकारी तथा निजी बसों में 100 प्रतिशत निशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की जाए। उनका कहना है कि यह व्यवस्था केवल एक दिन और केवल एक परीक्षा के लिए ही होगी, जिससे दूर-दराज़ के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को आर्थिक राहत मिल सकेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि चूँकि परीक्षा से जुड़ी त्रुटि विश्वविद्यालय स्तर पर हुई है, इसलिए इसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों पर नहीं पड़ना चाहिए। प्रशासन यदि इस विषय में सकारात्मक निर्णय लेता है, तो इससे सैकड़ों विद्यार्थियों को राहत मिलेगी और उन्हें दोबारा परीक्षा देने के लिए आने-जाने में आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
फिलहाल इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आधिकारिक रूप से पुनः परीक्षा की तिथि की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन विद्यार्थियों और सामाजिक संगठनों के बीच इस विषय को लेकर चर्चा जारी है। अब सबकी नजर जिला प्रशासन और विश्वविद्यालय के आगामी निर्णय पर टिकी हुई है।










